पलके उठाके देख…
अभी भी सूरज जगमग है
अभी भी राते शबनम है
अभी भी हवा दीवानी है
क्यों तेरे आँख में पानी है…
Category: Hindi Poems
कुसूरवार
हम तो थे बागी
जीते थे हर पल दिल चाहे वैसे
हम नीले आसमा के ओर उड़ते है
हम नीले आसमा के ओर उड़ते है
तब हरि धरती बुला लेती है
धरती पे लपक जाते है
तो नीला आसमा बुलाने लगता है
खाली हाथ
आऊँगी तेरे दर पे
हाँ जरूर ऐ खुदा…
खुदा
मैं बंधनो को जान गयी हूँ।
हालातो के सामने रुक गयी हूँ।
यादे
यादे उन फूल की पंखुड़ियों की तरह होती है
जो बिखरके भी देर तक खुशबू देती है…
पता नही दिमाग के कौनसे कोने में छुपी रहती है वो…
क़िसमत
साँसे भी उधार है
खुशियाँ है तोहफ़ा
मेहनत एक देन है
जिंदगी है धोका…
सच्ची खुशी
जो बैठे बैठे
बिना वजह छू जाए…
