ऐसे मोके पी मत पूछना
जब मिजाज रंगीन हो…
Category: Hindi Poems
मुसाफिर
अक्सर खुदा के सामने
वो झुकते है…
अहम् ब्रह्मास्मि
सागर से गहरी मैं हूँ
परबत से ऊँची मैं
ज्वाला सी गरम मैं हूँ…
शुरुवात
जहा पे दर्द है
वही इक आस है
जहा पे ख़ामोशी
कश्मकश साथ है…
अकेलापन
चाहती हूँ
कुछ कर गुजर जाऊ
जिंदगी के जलसे में!!!
पर…
अजीज़
मेरी बिखरी सी जिंदगी
शायद कभी न जुड़े…
पापा
एक दोस्त है…
पक्का दोस्त!
राज
आँखे कुछ कहे
पर लफ्ज़ कहते नहीं…
