पता नहीं ऐ गम
मैंने तुझे क्यों चुना…
Tag: poems
हाँ हम जी रहे है
बस ये पल है
इनमे साँस ले रहे है
हाँ हम जी रहे है
सफलता के बहोत दोस्त है
मिले तो खुश
वरना…
बुढ़ापा
बुझे बुझे सपने
याद दिलाते है
के मैं भी कभी जवान थी…
इंद्रधनुषी ख्वाईशो से
आसमा में मेरी उड़ान थी…
जिंदगी
फूल तो खिलना चाहते है
पर रौषनी नसीब नहीं…
दिल का टूटना
दिल टूटता है तो…
किस किस को…
किस किस को छोड़ू…
भगवान
सबको माँफ कर दू
पर भगवान् को कैसे माँफ करू…
रोष !!!
जाळून घे जळून घे
थोडं तरी मरून घे
Train च्या प्रवासात
गर्दीच्या घामात
रोज स्वतःला मळून घे
