तू ख़ूबसूरत नहीं बन सकता
पर बहोत खूब तो बन सकता है
तू ख़ुशनसीब नहीं बन सकता
पर…
Tag: shayri
दिवाने
निकले तो थे मक़्सद से
मंजिल की तरफ जोश में
पर…
मैं हूँ अभी भी…
मैं हूँ अभी भी
तुम्हारे अकेलेपन के लिए
अपने सन्नाटे को आवाज देकर…
दास्ताँ
कलम को हातो में थामे
दिल क्या कुछ लिखता है…
तनहाई
कुछ खट्टे कुछ मीठे
ख़याल लाती है
अकेले में दिल को…
काँटे
लोग हैरान है
कितने काँटे है हमारे रास्ते में…
आजमाया
कितनी मन्नतो के बाद
मैंने तुम्हे पाया है…
ऐ जिंदगी…
ऐ जिंदगी
तेरा लाख लाख शुक्रिया…
