मैं वो नही हूं
जो दिखती हू तुम्हे
जिम्मेदारियों की
बोझ के तले
दबने के बाद!
मैं वो नही हूं
जो बच जाती है
घड़ी के काटो के पीछे
भागने के बाद!
दफ्तर के
दाव पेच से सेहमी..
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Tag: shayri
जिये जा रहे थे
जिये जा रहे थे फिसलती रेत की तरह
कुछ पाने का जज्बा न था
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और…
तुम आये थे तब की बात है
जिंदगी खूबसूरत बारिश थी
अब सिर्फ
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मलाही वाटतं
मलाही वाटतं
माझ्यावर कुणीतरी
मनापासून प्रेम करावं…
अपेक्षांच्या पलीकडे
सुंदर एक नातं असावं…
थोडं त्याने बदलावं
थोडं बदलेन मी
आमचं एक छानसं
घरकुल व्हावं…
मलाही वाटतं
पूर्ण वाचा
हर चीज
हर चीज पा नही सकते
पर
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खूबसूरत
चीज मस्त है
इसलिए उसकी वॉरंटी नही होती
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रिश्ते
रिश्तो का कुछ ऐसा ही है भैय्या
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दोस्त
दोस्त तो बहोत होते है
पर बुरे वक्त एक ने भी सहारा दिया
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